जंगल में आग लगने पर, सबसे पहले गांववालों को मिलेगा मैसेज

February 25,2020

गर्मी की शुरुवात हो चुकी है, और इस तेज गर्मी में देखने में आया है की आये दिन जंगलो में आग लग जाती है

नागपुर : गर्मी की शुरुवात हो चुकी है, और इस तेज गर्मी में देखने में आया है की आये दिन जंगलो में आग लग जाती है। ऐसे में इस ग्रीष्म में आग की घटनाओं पर वन विभाग रोक लगाने का आश्वासन दे रहा है। क्योकि अब जंगल में लगनेवाली आग को बुझाने के लिए पहले गांव के लोग पहुंचेगे। जिसके लिए आग की घटनाओं के कारण अब फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की ओर से गांववालों को मैसेज भेजा जाएगा। जंगल के समीप रहने के कारण मैसेज मिलते ही गांववाले तुरंत घटनास्थल पर पहुंच कर आग बुझाने का प्रयास कर सकेंगे। हालांकि यह संदेश अन्य वन कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों तक पहुंचने से तुरंत वन विभाग की भी टीम घटना स्थल पर पहुंच सकेगी।
पता हो की नरखेड, पारशिवनी, दक्षिण उमरेड, उत्तर उमरेड, कोंढाडी, काटोल, हिंगणा, देवलापार, रामटेक, पवनी, कलमेश्वर, सेमिनरी हिल्स, बुट्‌टीबोरी, खापा आदि क्षेत्र में शाकाहारी वन्यजीव जैसे नीलगाय, जंगली सुअर, जंगली खरगोश, हिरण, काले हिरण आदि की मौजूदगी है। इन वन परीक्षेत्र के आस-पास कई गांव भी बसें हैं। खासकर गर्मी में जंगल में आग लग जाती है, जो मिनटों में कई हेक्टर जंगल को खाक कर देती है। आग की घटना का तुरंत पता चलने के लिए वन विभाग फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया पर निर्भर रहता है।
नासा और इसरो की सेटलाइट की मदद से विभाग को जंगल में लगी आग की जानकारी देती है। लेकिन भलेही आग लगने के बाद संबंधित कर्मचारी व अधिकारी को इसकी जानकारी मिलती है। किन्तु प्वाइंट से आग लगने की जगह ४० किमी तक दूर रहने से वन विभाग के पहुंचते-पहुंचते छोटी आग बड़ा विकराल रुप धारन करने से वन्यजीवों से लेकर जंगली क्षेत्र को नुकसान होता है। ऐसे में अब वन विभाग ने जंगल क्षेत्र से के आस-पास रहनेवाले गांववालों की मदद लेना शुरू कर दिया है। संयुक्त वन व्यवस्थापन समिति की नाम से शुरू की गई समिति में गांव के सरपंच को या एक्टिव व्यक्ती को अध्यक्ष बनाया जा रहा है। जिसका फोन नंबर फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया के पास होगा। आग लगने पर विभाग द्वारा जानकारी जब वन विभाग को भेजी जाएगी, तब मैसेज संबंधित गांव के अध्यक्ष को भी जाएगा। जिसके तुरंत बाद ही गांव निवासी घटनास्थल पर पहुंच अपने स्तर पर आग बुझाने का प्रयास करेंगे।