मुख्यमंत्री फडणवीस के नामांकन पर आपत्ति को खारिज किया गया


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नागपुर : शुक्रवार को विधान सभा चुनाव के लिए उमेदवारो के नामांकन दाखिल करने का आखरी दिन था, जिससे भाजपा से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, कांग्रेस से आशीष देशमुख ने नामांकन दाखिल किया । जिसके बाद शनिवार की सुबह दक्षिण-पश्चिम विधान सभा क्षेत्र से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी कांग्रेस के उमेदवार आशीष देशमुख, आम आदमी पार्टी के उमेदवार अमोल हाडके, निर्दलीय प्रशांत पवार व अरुण निटोरे चुनाव निर्णय अधिकारी (आरओ) शेखर घाडगे के कार्यालय पहुंचे और फडणवीस के नामांकन पर आपत्ति जताते हुए उसे खारिज करने की मांग करने लगे। 
उन्होंने आरोप लगाया की फडणवीस इनके प्रतिज्ञापत्र में अधूरी जानकारी देने के अलावा नोटरी (मुहर) व स्टैंप में लिखी तिथि में अंतर है । आरओ ने आरोपों को ध्यान में रखकर तुरंत फडणवीस के नामांकन समेत सभी दस्तावेज लिफाफे में सील बंद कर इस पर शाम ४ बजे सुनवाई रखी। जिसके बाद शाम पौने दो घंटे की सुनवाई के बाद आरओ शेखर घाडगे ने आपत्तियों को खारिज करते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस के नामांकन को क्लीन चीट दी। प्रत्याशियों ने लिखित में निवेदन देकर आरोप लगाया कि फडणवीस ने नामांकन में रामगिरि बंगला, विधायक निवास के कमरों (मुंबई व नागपुर के) की जानकारी नहीं दी और इन जगहों का नो ड्यूज सर्टिफिकेट नहीं लगाया। इसके अलावा प्रतिज्ञापत्र में ऊपर ३ अक्टूबर २०१९ व नोटरी की मुहर में २८ दिसंबर २०१८ होने पर आपत्ति जताई। 
आपत्तियों को ध्यान में रखकर आरओ ने तुरंत सीएम के नामांकन संबंधी सभी दस्तावेज सील बंद लिफाफे में जमा किए और उस पर कांग्रेस प्रत्याशी आशीष देशमुख, आप के अमोल हाडके व प्रशांत पवार के हस्ताक्षर लेकर शाम ४ बजे सुनवाई रखी। शाम के ४ बजते ही पक्ष व विपक्ष वकीलों के साथ वहां पहुंचे, विपक्षी प्रत्याशियों के सैकडों कार्यकर्ता भी परिसर में थे। मुख्यमंत्री की ओर से पार्षद संदीप जोशी वकीलों के साथ वहा उपस्थित हुए तो इधर एड। सतीश उके अपने साथी वकीलों के साथ पहुंचे। जिसके बाद पौने दो घंटे तक सुनवाई के बाद आरओ ने आपत्तियों को खारिज कर दिया और मुख्यमंत्री फडणवीस को क्लिन चीट दी । कांग्रेस के आशीष देशमुख, डा। नितीन राऊत, प्रशांत पवार ने इसे लोकतंत्र की हत्या बताते हुए नारेबाजी की। तीनों नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार के दबाव में फैसला दिया गया। यह लोकतंत्र की हत्या है, सभी ने प्रशासन के इस फैसले को कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है । 



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