विजयादशमी पर्व : शहर में तैयार हो रहे हैं रावण के विशालकाय पुतले


  • विजयादशमी पर्व : शहर में तैयार हो रहे हैं रावण के विशालकाय पुतले
    विजयादशमी पर्व : शहर में तैयार हो रहे हैं रावण के विशालकाय पुतले
    असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक विजयादशमी पर्व को मनाने पूरा शहर तैयार है
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नागपुर : असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक विजयादशमी पर्व को मनाने पूरा शहर तैयार है। जिसके लिए नागपुर में रावण के पुतले बनाये जा रहे है । नागपुर में हर वर्ष रावण के १५ से १८ विशालकाय पुतले तैयार होते हैं। इनके अलावा कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले भी बनाए जाते हैं। जानकारी के अनुसार इनके ऑर्डर दो से तीन महीने पहले से आ जाते हैं। यह काम शहर में केवल बिनवार परिवार ही करता है। वे १० फीट से ८० फीट ऊंचे रावण बनाते हैं। शरीर के सभी अंग अलग अलग बनाकर बाद में उन्हें जोड़ा जाता है। इसके निर्माण के लिए बांस, कागज, लकड़ी, सूत, रस्सी, गाेंद, रंग, मिट्टी आदि सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। इनकी कीमत फीट के हिसाब से तय की जाती है।

बता दे इस काम के लिए अनुभवी कारागीरों की शहर में मारामारी है, आसानी से कारागीर नहीं मिलते। नये लोगों को बांस का स्ट्रक्चर बनाने से लेकर कागज चिपकाने समेत सभी काम सिखाने पड़ते हैं। हर वर्ष की तरह शहर के महल और कड़बी चौक स्थित सनातन धर्म सभा हॉल में पुतले बनाने का काम चल रहा है।
ऐतिहासिक नागपुर में रावण बनाने की परंपरा ७१ साल पहले शुरू हुई थी । भारत-पाकिस्तान के विभाजन के बाद १९४८ में कानपुर के एक प्रोफेसर ध्यानसिंह ठाकुर नागपुर आये थे। उन्होंने देखा कि यहां सनातन धर्म का महत्वपूर्ण त्योहार दशहरा तो मनाया जाता है, किन्तु यहा रावण का दहन नहीं किया जाता। उस समय रावण दहन केवल दिल्ली और उत्तर भारत में होता था। ठाकुर ने यहां रावण दहन की संकल्पना रखी। पंजाब सेवा समिति ने रावण दहन की तैयारी दिखायी लेकिन उस समय सबसे बड़ी समस्या यह थी कि रावण का पुतला कहां से लाएंगे। तब हेमराजसिंह बिनवार जो कागज और बांबू से कलाकृति बनाने में माहिर थे, उनसे संपर्क किया गया। वे रावण का पुतला बनाने के लिए तैयार हो गए तभी से शहर में विजयादशमी पर्व पर रावण दहन की परम्परा चल रही है।  



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