एनडीडीबी और महाराष्ट्र सरकार के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर



नागपुर :  सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने डेयरी टेक्नोलॉजी कंपनी मूफार्म, नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) और महाराष्ट्र सरकार के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर कार्यक्रम की घोषणा की, शहर के वनामती में आयोजित कार्यक्रम के मौके पर बोलते हुए नितिन गडकरी ने कहा “की सभी के संयुक्त तौर पर काम करने को लेकर हुई घोषणा सरकार की विदर्भ मराठवाड़ा डेयरी विकास परियोजना (VMDDP) के मद्देनजर की गयी है, ताकि डेयरी में आईसीटी को लाया जा सके और मूफार्म द्वारा व्हाईटटेक रवैये के माध्यम से एनडीडीबी के राशन बैलेंसिंग कार्यक्रम को बढ़ावा दिया जा सके।

मूफार्म की व्हाइटटेक क्रांति का उद्देश्य एक बड़े डेटा विश्लेषण पर निर्भर होकर पशु पालन और दूध उत्पादन में उत्पादकता और एकरूपता लाने के लिए सही समाधान ढूँढना है, ताकि डेयरी कृषि उद्योग का तकनीकीकरण किया जा सके । इस टेक्नोलॉजी में फार्म व मवेशियों से सम्बंधित विशिष्ट डेटा सम्मिलित है जिसमें नस्ल, रोग, टीकाकरण, उपज के साथ साथ सफल कैल्विंग व हीट लक्षणों जैसे महत्वपूर्ण कारक शामिल हैं । छोटे धारक डेयरी किसानों के पास ई-लर्निंग वीडियो तक आसान पहुंच होती है जो मवेशियों के जुड़े अलर्ट भी जारी करते हैं जिससे किसानों को उनके डेयरी और मवेशी प्रबंधन के के लिए हर एक कदम पर मदद मिलती है।

मूफार्म के फाउंडर व चेयरमैन परम सिंह ने कहा कि, मूफार्म ने हाल ही में माइक्रोसॉफ्ट के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फॉर अर्थ ग्रांट को जीता है और मशीन लर्निंग का उपयोग करके कैमरा-लैस मास्टिटिस डिटेक्शन सुविधा विकसित कर रहा है। मूफार्म ने ऐप में बनी मोबाइल कैमरा का उपयोग करके मवेशियों की पहचान करने के लिए फेस रिकग्निशन फीचर विकसित की है जो मवेशी की पहचान में बेशक के अभूतपूर्व कदम साबित हो सकता है। इसने ९५।७% सटीकता के साथ फेस रिकग्निशन मॉडल का परीक्षण किया है और अब १००% सटीकता प्राप्त करने का लक्ष्य कंपनी ने निर्धारित किया है। यह सुविधा बीमा में धोखाधड़ी के जोखिम को भी कम करता है और किसानों के साथ-साथ बीमा कंपनियों को पशु बीमा लेने के लिए अधिक से अधिक प्रोत्साहन देता है। इस तकनीक को ग्लोबल इंश्योरटेक चैलेंज में विश्व बैंक से पुरस्कार भी मिला है ।

मूफार्म भारत के युवाओं के एक बड़े नेटवर्क को ग्राम स्तर के उद्यमी के तौर पर शामिल करना चाहता है ताकि यह नेटवर्क मवेशियों के पोषण, डिजिटल साक्षरता, और कृषि कौशल पर किसानों को प्रशिक्षण प्रदान करने में मददगार साबित हो और आगे चलकर उत्पादित दूध की गुणवत्ता और मात्रा में सुधार कर सके । इससे जाहिर है कि किसानों की आय में भी बढ़ोतरी हो सकेगी । टेक्नोलॉजी के ट्रान्सफर और डिजिटल व कृषि साक्षरता के विस्तार के प्रति उनका ध्यान व विश्वास दोनों मजबूती से जुड़े हैं । इसके पास कृत्रिम गर्भाधान श्रमिकों को एकीकृत करने की योजना भी है, ताकि भौगोलिय दशा में कोई भी अहम् न छूटे जिससे यह डेयरी किसानों को विश्वसनीय सेवाएं प्रदान कर सके और उनकी दूध उत्पादकता व आय बढ़ाने के साथ साथ लागत कम करने में भी मदद कर सके। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव, पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन, महाराष्ट्र सरकार के अनूप कुमार उपस्थित थे ।



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