प्रेम कहानी की याद में फिर होगा 'पत्थर युद्घ'



मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले की जाम नदी के तट पर शनिवार को फिर प्रेम कथा की याद में पत्थर युद्घ होगा। दो गांव के लोगों में होने वाले इस पत्थर युद्घ के मौके पर मेला भरता है और इसे गोटमार मेला कहा जाता है। प्रशासन इस पत्थर युद्घ को बगैर खून खराबे के निपटाने की जुगत में है।

यहां के पांढुर्ना क्षेत्र में हर साल पोला के अगले दिन जाम नदी के तट पर गोटमार मेला लगता है। इस मेले का आयोजन एक प्रेम कहानी की याद में होता है। जाम नदी के दोनों तट पर सांवरगांव और पांढुर्ना के लोग जमा होते हैं और एक-दूसरे पर पत्थर बरसाते हैं। किसी तरह की अप्रिय घटना घटित न हो, इसके चलते जिलाधिकारी श्रीनिवास शर्मा ने शुक्रवार सुबह आठ बजे से म़ प्ऱ मानव अधिकार आयोग की अनुशंसाओं के पालन के तहत पांढुर्ना में गोटमार मेले के दौरान धारा 144 लागू कर दी है, जो रविवार सुबह तक लागू रहेगी।

किंवदंती है कि पांढुर्ना गांव का एक युवक सांवरगांव की आदिवासी युवती को प्रेम विवाह करने के उददेश्य से अगवा कर ले गया था। इसे लेकर दोनों गांवों के लोगों के बीच पत्थरबाजी हुई थी, जिसमें प्रेमी युगलों की मौत हो गई थी। तभी से प्रेम के लिए शहीद हुए इन युवक-युवती की याद में हर साल पोले के दूसरे दिन यह रस्म दोहराई जाती है। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए दोनों गांव के लोग आज भी जाम नदी में गोटमार करते हैं।

बताते हैं कि इस दौरान ग्रामीण चंडी माता को प्रसन्न करने जाम नदी के बीच में पलाश के वृक्ष की टहनी और एक झंडा गाड़ते हैं। इस झंडे को दोनों ओर से चल रहे पत्थरों के बीच उखाड़ना रहता है। जिस गांव के लोग झंडा उखाड़ लेते हैं, वे विजयी माने जाते हैं। नदी के बीच से झंडा उखाड़ने के बाद इसे चंडी माता को चढ़ा दिया जाता है।

अमर प्रेम कहानी की याद में खेला जाने वाला यह खेल सुबह झंडे गाड़ने और माता चंडी की पूजा के साथ शुरू हो जाएगा, जो सूर्यास्त तक चलेगा। सूर्यास्त के पूर्व जो झंडा तोड़ेगा, वही विजयी कहलाएगा। इस दौरान होने वाली पत्थरबाजी में हर साल सैकड़ों लोग घायल होते हैं। दोनों गांव के लोग कई दिन पहले से नदी के दोनों तटों पर पत्थर इकट्ठा करना शुरू कर देते हैं।

कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी डॉ़ शर्मा ने आदेश के जरिए संपूर्ण नगरपालिका क्षेत्र पांढुर्ना एवं गोटमार मेला क्षेत्र पांढुर्ना में घातक हथियार जैसे चाकू, लोहे की छड़, लाठी, तलवार, भाला, बरछी, फरसा, गंडासा व आग्नेयस्त्र, पत्थर, गोफन (पत्थर चलाने के लिए रस्सी का बनाया गया अस्त्र) को लेकर चलना, उनका गोटमार के लिए उपयोग करना और सार्वजनिक प्रदर्शन प्रतिबंधित कर दिया गया है। इतना ही नहीं ग्राम सांवरगांव और पांढुर्ना के मध्य स्थित मेला स्थल व मेला स्थल के दोनों ओर के 500 मीटर की परिधि में किसी भी प्रकार के पत्थरों के परिवहन, एकत्रीकरण और गोटमार खेल में पत्थर का उपयोग प्रतिबंधित है।

पुलिस और जिला प्रशासन द्वारा इस मेले में घायल होने वालों के उपचार के लिए आयोजन स्थल पर अस्थाई उपचार केंद्र बनाए जाते हैं, साथ ही गंभीर घायलों को बाहर ले जाने के लिए विशेष एंबुलेंस की भी व्यवस्था की जाती है। साथ ही बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती भी की जाती है।



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