सुप्रीम कोर्ट मुख्यमंत्री फडणवीस के खिलाफ मामले में बुधवार को करेगा सुनवाई



नागपुर : राज्य के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस द्वारा २०१४ में हुए चुनाव के दौरान नामांकन के समय दिए हलफनामे में न्यायालय में लंबित दो आपराधिक मामलों की जानकारी छुपाए जाने के मामले पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। करीब २०-२५ मिनिट तक मामले को सुनने के बाद अदालत इस मामले के कानूनी प्रावधानों पर संतुष्ट नजर आई और मामले की अगली सुनवाई कल १२ दिसंबर को की जायेगी I सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगाई और न्यायाधीश संजय किसन कौल की बेंच के समक्ष हुई सुनवाई में याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने जोरदार तरीके से दलील पेश की है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि मुख्यमंत्री फडणवीस के खिलाफ दो आपराधिक मामले न्यायालय में लंबित है। इन दोनों मामलों में एक जालसाजी, धोखाधड़ी और अपराधिक साजिश तथा दूसरा बदनामी करने का है। इन दोनों मामलों का अदालत ने संज्ञान लेकर आदेश जारी किया था। इस पर मुख्यमंत्री ने १९९८-९९ में दोनों मामलों में कोर्ट में प्रत्यक्ष हाजिर होकर तीन हजार रुपये के व्यक्तिगत मुचलके पर जमानत प्राप्त की थी। मुख्यमंत्री ने २०१४ के विधानसभा चुनाव में दायर किए हलफनामा में इन दोनों लंबित मामलों की जानकारी छुपाई है।

गौरतलब है कि याचिकाकर्ता सतीश उके ने इस मामले को सिंतबर २०१५ में नागपुर के न्यायिक मजिस्ट्रेट (फर्स्ट क्लास) के सामने उठाया था। हालांकि मजिस्ट्रेट ने इसका संज्ञान जरुर लिया, लेकिन मामला न बनने की बात कहकर आवेदन को खारिज कर दिया था। उसके बाद उके ने सेशन कोर्ट में अपील की। सेशन कोर्ट द्वरा इस मामले में फिर से विचार करने के न्यायिक मजिस्ट्रेट को आदेश दिए। जिसे मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ में चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई में नागपुर उच्च न्यायालय ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के फैसले को सही मानते हुए इसे खारिज कर दिया। इस आदेश एडवोकेट उके ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। जिस पर सोमवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदात ने इस मामले में चुनाव आयोग द्वारा समय-समय पर दिए गए हलफनामें के नमूने की गहराई में जाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई बुधवार तक टाल दी है I 



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