संस्कृत भाषा के अभ्यास के लिए वैश्विक स्तरपर समन्वय साधकर संशोधन को बढ़ावा


  • संस्कृत भाषा के अभ्यास के लिए वैश्विक स्तरपर समन्वय साधकर संशोधन को बढ़ावा
    संस्कृत भाषा के अभ्यास के लिए वैश्विक स्तरपर समन्वय साधकर संशोधन को बढ़ावा
     संस्कृत भाषा को वैश्विक स्तरपर मान्यता मिल रही है. जर्मन, अमरिका, ऑस्ट्रेलिया आदि प्रमुख विश्वविद्यालयों में ...
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नागपुर : संस्कृत भाषा को वैश्विक स्तरपर मान्यता मिल रही है. जर्मन, अमरिका, ऑस्ट्रेलिया आदि प्रमुख विश्वविद्यालयों में संस्कृत भाषा का अध्ययन हो रहा है. कवि कुलपति कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय की ओर से विश्व के विश्वविद्यालयों के साथ समन्वय साधकर संस्कृत अध्ययन के साथ संशोधन को बढ़ावा देकर एक प्रमुख अध्ययन केंद्र के रूप में विकसित करें, ऐसा प्रतिपादन राज्यपाल चे. विद्यासागर राव ने किया. रामटेक के कवि कुलपति कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय में माधव सदाशिव गोलवलकर गुरुजी गुरुकुल का शुभारंभ तथा नए शैक्षिक भवन का लोकार्पण राज्यपाल चे. विद्यासागर राव के हाथों हुआ. तथा गोलवलकर गुरुजी की प्रतिमा का अनावरण और शारदापीठ का शिलान्यास अनावरण राज्यपाल के हाथों हुआ.

इस समय पेजावरमठाधिपती श्रीविश्वेशतीर्थ श्रीपाद, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितीन गडकरी, पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, विधायक मल्लिकार्जून रेड्डी, विधायक गिरीश व्यास, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाहक भैय्याजी जोशी, कुलपति श्रीनिवास वरखेडी, पूर्व कुलपति डॉ. पंकज चांदे तथा अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित थे.

देश को संपन्न सांस्कृतिक परंपरा प्राप्त हुई है. भारतीय जीवनपद्धति और ज्ञानपद्धति विश्व की सर्वोत्तम मानी जाती है. संस्कृत कई भाषाओं की जननी हैं, भाषा के विभिन्न साहित्य प्रकारों में संस्कृत भाषा अनमोल ज्ञान सागर है, ऐसा बताते हुए राज्यपाल चे. विद्यासागर राव ने कहा, सुश्रुतसंहिता, चरकसंहिता जैसी स्वास्थ्य विषयक तथा भास्कराचार्य के लीलावती ग्रंथ में गणित विषयक मूलभूत विचार हमें दिखाई देते हैं. भास्कराचार्य ने खगोल गणित में किया कार्य महान है, उनके कार्य पर अधिक संशोधन होना जरूरी है, ऐसा उन्होंने बताया.



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