कोई गुनाह नहीं किया फिर भी बचपन बीत रहा सलाखों के पीछे


  • कोई गुनाह नहीं किया फिर भी बचपन बीत रहा सलाखों के पीछे
    कोई गुनाह नहीं किया फिर भी बचपन बीत रहा सलाखों के पीछे
    मां हम घर कब जाएंगे, इस सवाल पर जेल में बंद एक महीला कैदी बच्चे
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नागपुर : मां हम घर कब जाएंगे, इस सवाल पर जेल में बंद एक महीला कैदी बच्चे को दिलासा देती, रो पड़ती और पछताती। जी हां हम बात कर रहे है नागपुर स्थित मध्यवर्ती कारागृह में विचाराधीन महिला कैदियों के बच्चों की । जिनका बचपन मां के साथ सलाखों के पीछे बीत रहा है । कारागृह (जेल) परिसर में बनी महिला जेल में बंद तीन विचाराधीन महिला कैदियों के बच्चों का जीवन कुछ इसी गुजर रहा है। यह मासूम बेगुनाह होते हुए भी अपनी-अपनी मां के साथ जेल के सलाखों के पीछे अपना बचपन गुजारने पर मजबूर हैं। कारागृह में सलाखों के पीछे तीनों मासूमों को पता ही नहीं कि वो किस वजह से यहाँ बंद हैं।

जानकारी के अनुसार नागपुर मध्यवर्ती कारागृह में महिला जेल में ८० से अधिक महिला कैदी सजा काट रही हैं, जिसमे विचाराधीन महिला कैदी अपने बच्चो के साथ जेल में हैं, वही जेल प्रशासन का दावा करता रहता है कि वह इन मासूम बच्चों का विशेष ख्याल रखा जाता हैं। जेल में बंद एक विचाराधीन महिला कैदी तो ऐसी है, जिसका बेटा जेल प्रशासन की निगरानी में ही जन्मा है, जब वह गिरफ्तार हुई थी तब वो मासूम कोख में था। उस महिला पर आरोप है कि उसने पति और रिश्तेदारों की मदद से डेढ़ वर्षीय मासूम बच्ची और उसकी दादी का बेरहमी से कत्ल करने में मदद की थी। विचाराधीन कैदी रेहाना (परिवर्तित नाम) का बच्चा जेल में ही बड़ा हो रहा है। वही रेहाना की तरह जेल में बंद अन्य दो विचाराधीन महिलाओं के मासूम बच्चों की दुनिया जेल ही बन चुका है। जिससे जेल में बेटे काे जन्म देने वाली महिलाओ को अब चिंता सताने लगी है, की भविष्य में उसके बेटे की उम्र को देखते हुए इस बात की अनुमति जेल प्रशासन नहीं देगा जिसे ५ वर्ष बाद उनके बच्चो को उससे दूर कर किसी परिजन को सौपा जाएगा।



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