ऑरेंज क्लस्टर बनेगा नागपुर में : बढ़ेगा संतरे का निर्यात

February 17,2020

उपराजधानी को देश ही नहीं बल्कि विदेश में संतरे के शहर के नाम से जाना जाता है

नागपुर : उपराजधानी को देश ही नहीं बल्कि विदेश में संतरे के शहर के नाम से जाना जाता है, अब इसी शहर को ऑरेंज क्लस्टर बनाया जाएगा। जिसके लिए संतरे का निर्यात बढ़ाने के लिए संतरा नगरी में जरूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाया जाएगा। इस काम के लिए एग्रीकल्चर एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी नोडल एजेंसी होगी। जानकारी के अनुसार वर्ष २०१८ में १,०१८.३ करोड़ डॉलर के संतरे का अंतरराष्ट्रीय व्यापार हुआ। भारत में २०१८-१९ में ८,७८१ हजार टन संतरे का उत्पादन हुआ था, जिसमें मंडारिन व क्लेमेंटाइन किस्म भी शामिल हैं। कृषि निर्यात नीति (एईपी) के तहत नागपुर का विकास ऑरेंज क्लस्टर के रूप में करने का फैसला किया गया है। एईपी के तहत निर्यात बढ़ाने के लिए बाजार की पहचान करना है। नागपुर से मुख्यत: मध्य पूर्व के देशों को संतरे का निर्यात होगा। एईपी के तहत नागपुर और नागपुर के आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के संतरे की विशेष ब्रांडिंग भी होगी।
बता दे उपराजधानी नागपुर से दुबई के लिए संतरे की पहली खेप १३ फरवरी २०२० को भेज दी गई है। यह खेप नवी मुंबई के वाशी से भेजी गई। वेनगार्ड हेल्थ केयर परिसर से रेफ्रिजरेटेड कंटेनर में कुल १,५०० क्रेट्स भेजे गए। संतरे की नागपुर मंडारिन किस्म दुनिया की सबसे अच्छी किस्मों में से एक है। मध्य और पश्चिम भारत में हर साल इस किस्म की उपज बढ़ रही है। मृग फसल (मानसून ब्लॉजम) में निर्यात की काफी संभावनाएं हैं। यह फसल फरवरी और मार्च में तैयार होती है। इस अवधि में अंतरराष्ट्रीय बाजार में मंडारिन किस्म की आवक कम रहती है।

विदर्भ और किसानो का विकास
यदि नागपुर को ऑरेंज क्लस्टर बनाया जाता है तो विदर्भ सहित यहां के उद्योगों और किसानों का विकास होगा। इस साल मृग बहार में संतरे का उत्पादन काफी अच्छा हुआ है। नागपुर की कलमना मंडी में रोजाना ९०० से १००० टन संतरे की आवक हो रही है। यह संतरे नागपुर के साथ ही परतवाड़ा, अचलपुर, दारव्हा, नरखेड़, मोहपा, सावनेर, कोंढाली, काटोल आदि स्थानों पर छोटी-छोटी से शहर में एते है और यहाँ से संतरे का निर्यात विदेशों में किया जाने लगा है।